AtoZpe.in

Latest Information In World

संतोषी मा की आरती

संतोषी मा की आरती

मैं तो आरती उतारूं रे संतोषी माता की

जय जय संतोषी माता जय जय माँ

बड़ी ममता है बड़ा प्यार माँ की आँखों में

बड़ी करुणा माया दुलार माँ की आँखों में

क्यूँ न देखूँ मैं बारम्बार माँ की आँखों में

दिखे हर पल नया चमत्कार माँ की आँखों में

नृत्य करूँ छूम घूम झूम झमा झम झूम झूम

झाँकी निहारूँ रे ओ प्यारी-२ झाँकी निहारूँ रे

मैं तो आरती उतारूँ रे संतोषी माता की

जय जय संतोषी माता जय जय माँ

सदा होती है जय जयकार माँ के मन्दिर में

नित झाँझर की हो झंकार माँ के मन्दिर में

सदा मँजीरे करते पुकार माँ के मन्दिर में

दिखे हर पल नया चमत्कार माँ के मन्दिर में

दीप धरूँ धूप धरूँ प्रेम सहित भक्ति करूँ

जीवन सुधारू रे ओ प्यारा-२ जीवन सुधारू रे

मैं तो आरती उतारूँ रे सन्तोषी माता की

संतोषी मां का परिचय

संतोषी मां, जिन्हें संतोषी माता भी कहा जाता है, भारत के हिंदू धर्म में एक अत्यंत श्रद्धेय देवी मानी जाती हैं। उनका नाम ‘संतोष’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है संतोष और खुशी। संतोषी मां विशेष रूप से उनकी भक्तों के बीच एक प्रतीक के रूप में देखी जाती हैं, जो जीवन में संतोष और समर्पण की भावना को प्रकट करती हैं। भक्तों का मानना ​​है कि संतोषी मां उनके दुःख और कठिनाइयों में सहायता करती हैं, और उनके जीवन में सुख और समर्पण को लाती हैं।

संतोषी मां का स्वरूप आमतौर पर एक सुंदर महिला के रूप में प्रस्तुत किया जाता है, जो एक पीले रंग की साड़ी में सजी होती हैं। उनके हाथों में अक्सर गुड़ और चना होता है, जो उनके भक्तों द्वारा उन्हें भेंट किए जाने वाले प्रसाद का प्रतीक है। संतोषी मां का मंन्दिर भारत के विभिन्न हिस्सों में पाया जाता है, जहाँ भक्त नियमित रूप से उनकी पूजा करते हैं और उनके प्रति अपनी श्रद्धा अर्पित करते हैं।

संतोषी मां की पूजा विशेष रूप से शुक्रवार के दिन की जाती है। इस दिन भक्त उनके समर्पण में उपवास रखते हैं और विशेष रूप से उनके लिए तैयार किए गए प्रसाद का भोग भी अर्पित करते हैं। सप्तमी तिथि को उनकी पूजा को अधिक महत्वपूर्ण माना जाता है। भक्तों का विश्वास है कि यदि वे सच्चे मन से मां संतोषी की आराधना करते हैं, तो वे अपने जीवन में सुख, शांति, और संतोष प्राप्त कर सकते हैं। इस प्रकार, संतोषी मां अपने भक्तों के जीवन में न केवल आशा और संजीवनी का संचार करती हैं, बल्कि उनके संपूर्णता की भावना को भी बढ़ावा देती हैं।

संतोषी मां की पूजा का महत्व

संतोषी मां की पूजा हिन्दू धर्म में एक विशेष स्थान रखती है। यह पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए महत्वपूर्ण है जो अपने जीवन में धन, सुख, और संतोष की प्राप्ति की इच्छा रखते हैं। संतोषी मां का ध्यान करने से न केवल भौतिक सुख की प्राप्ति होती है, बल्कि मानसिक शांति भी मिलती है। महिला और पुरुष दोनों ही इस पूजा को अपनी धार्मिक आस्था के अनुसार करते हैं।

संतोषी मां की पूजा करने का एक निर्धारित समय होता है, जिसमें शुक्रवार का दिन विशेष रूप से महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन भक्तगण उपवासी रहकर सच्चे मन से मां का ध्यान करते हैं और उनके चरणों में अपनी समस्याओं और इच्छाओं को समर्पित करते हैं। पूजा के दौरान दही, गुड़ और चने का विशेष उपयोग किया जाता है, जो इस पूजा का अभिन्न हिस्सा हैं। इसे श्रद्धा और विश्वास के साथ अर्पित करने से मां की कृपा प्राप्त होती है।

संतोषी मां की पूजा का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इससे भक्तों को मानसिक संतोष की प्राप्ति होती है। यह पूजा मन के द्वंद्वों को कम करती है और व्यक्ति को जीवन में सकारात्मकता का अनुभव कराती है। इसके अतिरिक्त, यह पूजा धन के अभाव, कार्य में विघ्न, और अन्य समस्याओं से राहत दिलाने में सहायक होती है। इस प्रकार, संतोषी मां की पूजा न केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक है, बल्कि यह जीवन के विभिन्न पहलुओं में संतोष और समृद्धि लाने का माध्यम भी है। इस पूजा के माध्यम से भक्त अपने जीवन में संतोष और खुशहाली की कामना करते हैं, जो इसे और भी महत्वपूर्ण बनाता है।

संतोषी मां की कथा

संतोषी मां की कथा भारतीय धार्मिक ग्रंथों में एक अत्यंत प्रेरणादायक और महत्वपूर्ण कहानी के रूप में प्रस्तुत की जाती है। यह कहानी संतोष की देवी को समर्पित है, जो अपने भक्तों की समस्याओं का समाधान करने के लिए जानी जाती हैं। कथा के अनुसार, एक बार एक गरीब कन्या ने संतोषी मां की पूजा की, क्योंकि वह अपनी कठिनाइयों का सामना करना चाहती थी। इस कन्या ने श्रद्धा और विश्वास के साथ मां का ध्यान किया और मां ने उसकी पुकार सुनी।

भक्ति की इस कथा में यह वर्णित है कि संतोषी मां ने अपने भक्तों को हमेशा हर प्रकार की सहायता प्रदान की है। उन्होंने अपनी भक्त कन्या को एक बड़ा फल और मिठाई का प्रसाद दिया, जिससे उसकी दीन-हीन अवस्था और आर्थिक परेशानियाँ समाप्त हो गईं। भक्तों का सच्चा प्रेम और समर्पण ही संतोषी मां के प्रति उनकी कृपा का आधार बनता है। कथा में यह भी उल्लेख है कि संतोषी मां उन भक्तों के साथ हमेशा रहती हैं, जो हर परिस्थिति में संतोष बनाए रखते हैं।

इस कथा में यह संदेश छिपा है कि मानव जीवन में चाहे कितनी भी कठिनाइयाँ आएं, यदि व्यक्ति अपने विश्वास और सामर्थ्य पर कायम रहे, तो संतोषी मां हमेशा उसकी मदद करेंगी। मां का यह आशीर्वाद और उनसे जुड़ी यह प्रेरणादायक कथा, भक्तों को साहस और संबल प्रदान करती है। संतोषी मां की उपासना को लेकर यह मान्यता है कि उनकी पूजा करने से भक्तों की सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं और जीवन में शांति और संतोष मिलता है।

संतोषी मां की पूजा विधि

संतोषी मां की पूजा, श्रद्धालुओं के लिए एक महत्वपूर्ण धार्मिक अनुष्ठान है, जिसमें विशेषतौर पर श्रद्धा और भक्ति का महत्व होता है। संतोषी मां की पूजा करने के लिए कुछ आवश्यक सामग्री की आवश्यकता होती है, जो इस पूजन के अनुष्ठान को संपन्न करने में सहायक होती है। सबसे पहले, पूजा के लिए आपको एक चौकी या पट्टी, पीला कपड़ा, और इष्टदेवता के स्वरूप के लिए मिट्टी या चांदी की प्रतिमा या चित्र की आवश्यकता होगी। साथ ही, कुछ मुख्य सामग्री जैसे गुड़, चना, और नारियल का भी पूजन में उपयोग किया जाता है।

पूजा की विधि को पूरक बनाने के लिए, अपने मन में सकारात्मक भावनाएँ और संतोष की भावना रखनी चाहिए। सबसे पहले, चौकी को अच्छी तरह से साफ करें और उस पर पीला कपड़ा बिछाएँ। फिर, संतोषी मां की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें। इसके बाद, ध्यानपूर्वक भगवान का ध्यान करना चाहिए एवं समर्पण भाव से पूजा शुरू करें। पूजा में सबसे पहले दीपक जलाना चाहिए और भगवान के समक्ष फूल अर्पित करना चाहिए। इसके पश्चात, गुड़ और चने का भोग प्रस्तुत करें। इस दौरान, ‘ॐ समस्त संतोषी मां’ का जाप करते रहें।

आखिर में, पूजा के समापन के दौरान, चरणामृत के साथ संकल्प लें कि आप अपनी इच्छाओं को पूरा करने के लिए संतोष को अपने जीवन में अपनाएंगे। पूजा समाप्त होने के बाद, भोग को परिवार के सभी सदस्यों के साथ बांटें, जिससे सभी को पुण्य फल प्राप्त हो सके। संतोषी मां की उपासना, विशेष रूप से शुक्रवार के दिन की जाती है, और श्रद्धालुओं द्वारा निरंतर भाव से इस पूजा को करना उनके जीवन में सुख और समृद्धि लाने का कार्य करता है।

संतोषी मां के चालीसा और अन्य भजन

संतोषी मां की पूजा एवं भक्ति में चालीसा और भजनों की विशेष भूमिका होती है। संतोषी मां का चालीसा विशेष रूप से भक्तों द्वारा श्रद्धा से पढ़ा जाता है। यह चालीसा चारों ओर संतोष, शांति और समृद्धि के लिए पर्यायवाची माना जाता है। भक्त इसे उच्च स्वर में पढ़ कर अपनी इच्छाओं को पूर्ण करने के लिए आशीर्वाद प्राप्त करते हैं। चालीसों के माध्यम से भक्त अपनी समस्याओं का समाधान पाने के लिए मां का स्मरण करते हैं, जिससे उन्हें मानसिक शांति और संतुष्टि मिलती है।

भजनों का महत्व केवल श्रद्धा से जुड़ा नहीं है, बल्कि यह ध्यान और भक्ति में भी सहायक होते हैं। भजन, जो कि भक्तिमय गीतों के रूप में होते हैं, भक्तों को आध्यात्मिकता की ओर प्रेरित करते हैं। संतोषी मां के भजनों का उद्देश्य संतोष और भक्ति का संचार करना है, जो समाज में सकारात्मकता फैलाने में मदद करते हैं। इन भजनों को सुनने और गाने से भक्तों के मन में मां के प्रति अपार श्रद्धा और विश्वास उत्पन्न होता है। भजनों में भक्त मां की महिमा का बखान करते हैं, जिससे उनकी शक्ति और कृपा का अनुभव होता है।

संतोषी मां के चालीसा और भजनों का पाठ केवल व्यक्तिगत भक्ति का साधन नहीं है, बल्कि यह सामुदायिक जुड़ाव का भी हिस्सा है। जब भक्त सामूहिकता में इन भजनों का गान करते हैं, तो उनमें एक विशेष ऊर्जा और सामंजस्य की भावना पैदा होती है। यह न केवल भक्ति का अनुभव करवाता है, बल्कि सामाजिक एकता को भी मजबूत करता है। इस प्रकार, संतोषी मां के चालीसा और भजन हमारे जीवन में एक सकारात्मक प्रभाव डालते हैं।

संतोषी मां की महिमा

संतोषी मां, जिन्हें संतोष और सुख की देवी माना जाता है, भारतीय संस्कृति और धार्मिकता में एक महत्वपूर्ण स्थान रखती हैं। उनका नाम सुनते ही भक्तों के मन में एक अद्भुत शांति और संतोष की अनुभूति होती है। यह कहा जाता है कि संतोषी मां भक्तों के दुखों को दूर करके उन्हें सुख-शांति प्रदान करती हैं। उनकी पूजा का विशेष महत्व है, विशेषकर शुक्रवार के दिन, जब भक्त बड़े श्रद्धा भाव से उनका स्मरण करते हैं।

संतोषी मां की महिमा का वर्णन अनेक पौराणिक कथाओं और ग्रंथों में मिलता है, जो उनकी शक्ति और कृपा का संकेत देते हैं। मान्यता है कि संतोषी मां की पूजा से जीवन में आशीर्वाद की वर्षा होती है और मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। जब भक्त उन्हें सच्चे मन से पुकारते हैं, तो उनकी कृपा से कठिनाइयाँ दूर हो जाती हैं और जीवन में सकारात्मकता का संचार होता है।

संतोषी मां का स्वरूप सरल और शांत है, जो भक्तों को मानसिक संतुलन और स्थिरता प्रदान करता है। उन्हें प्रसन्न करने के लिए भक्त अत्यंत सरल और सात्विक चीजें चढ़ाते हैं, जैसे कि गुड़, चने और फल। इन चिजों को चढ़ाने का अर्थ न केवल भक्ति है, बल्कि संतोष और संतुलन का प्रतीक भी है। इस प्रकार, संतोषी मां की महिमा केवल व्यक्तिगत जीवन में ही नहीं, अपितु सामाजिक और पारिवारिक स्तर पर भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। जब बहुधा भक्त संतोषी मां की कृपा से अपने परिवार में सुख-शांति का अनुभव करते हैं, तो उनकी आस्था और भी दृढ़ होती है।

भक्तों के अनुभव

संतोषी मां, जिन्हें संतोष की देवी माना जाता है, के भक्तों के अनुभव अनेक हैं। उनकी कृपा से लाखों लोग अपने जीवन में सकारात्मक बदलाव देखने में सफल रहे हैं। ये अनुभव हमें यह बताते हैं कि कैसे श्रद्धा और विश्वास से भरे भक्तों ने अपने कठिन समय में संतोषी मां की आराधना की और उनके धर्म, आस्था तथा भक्ति के माध्यम से संकटों से उबरे।

एक भक्त ने साझा किया कि उन्होंने नौकरी की तलाश में कई महीने बिताए, लेकिन सफलता नहीं मिली। उन्होंने संतोषी मां की उपासना की और शनिवार का व्रत रखा। कुछ ही दिनों में, उन्हें एक शानदार नौकरी का प्रस्ताव मिला। इस घटना ने उनके जीवन में एक नई रोशनी भर दी। उनके लिए संतोषी मां केवल एक देवी नहीं, बल्कि एक मार्गदर्शक बन गईं।

इसी प्रकार, एक अन्य भक्त ने अपने परिवार में गर्भस्थ शिशु की समस्याओं के बारे में बताया। उन्होंने संतोषी मां से प्रकोष्ठ के लिए प्राथना की। धीरे-धीरे, सब कुछ सामान्य हो गया। उन्होंने इस अनुभव को साझा करते हुए कहा कि संतोषी मां की ताकत अद्वितीय है और विश्वास रखने से किसी भी कठिनाई का समाधान संभव है।

धार्मिक आयोजनों में भी भक्त अपनी कहानियाँ साझा करते हैं। कई लोग लिखते हैं कि संतोषी मां की उपासना करने से न केवल उनकी इच्छाएँ पूर्ण हुईं, बल्कि उनके जीवन में शांति और संतोष की भावना भी आ गई। यह सब यह साबित करता है कि संतोषी मां की कृपा से भक्ति को एक नई दिशा और प्रेरणा मिलती है।

संतोषी मां के त्योहार

संतोषी मां की पूजा भारत में विशेष रूप से प्रत्येक शुक्रवार को की जाती है, जिसे संतोषी माता के पर्व के रूप में मनाया जाता है। इस दिन भक्तजन माता की कृपा प्राप्त करने के लिए उपवास रखते हैं और उनकी शैली में प्रसाद अर्पित करते हैं। भक्तों का मानना है कि संतोषी मां कठिनाइयों में उनकी सहायता करती हैं और उनके जीवन में संतोष लाने का कार्य करती हैं।

इसके अलावा, हर साल विशेष अवसरों पर भी संतोषी मां की पूजा की जाती है। इनमें मुख्य रूप से पूजा का आयोजन त्योहारों के दौरान होता है, जैसे कि गणेश चतुर्थी, नवरात्रि, और दीवाली। नवरात्रि के दौरान, भक्त लोग नौ दिनों तक उपवास रखकर माँ के विभिन्न रूपों की उपासना करते हैं, जिसमें संतोषी मां भी शामिल होती हैं। इस दौरान भक्तजनों का ध्यान उनकी श्रद्धा और भक्ति पर केंद्रित होता है।

संतोषी मां की पूजा की प्रक्रिया भी विशेष होती है। इसमें गाय के घी से बनी मिठाई, जैसे कि चारण की बर्फी, और नारियल अर्पित किया जाता है। इसके अतिरिक्त, भक्तों द्वारा सोमवार को रखे जाने वाले व्रतों का भी विशेष महत्व है, जो कि संतोषी मां की कृपा प्राप्त करने के लिए एक महत्वपूर्ण साधन माने जाते हैं। पूजा के बाद भोग को प्रसाद के रूप में बाँटा जाता है, जिससे समुदाय में भाईचारे और एकता को बढ़ावा मिलता है।

कुल मिलाकर, संतोषी मां के त्योहार न केवल धार्मिक विश्वास को दर्शाते हैं, बल्कि यह सामाजिक और सांस्कृतिक समृद्धि का भी प्रतीक हैं। लोग इन अवसरों पर एकत्र होकर माता का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं और जीवन में शांति तथा संतोष की कामना करते हैं।

निष्कर्ष

संतोषी मां एक अद्वितीय देवी मानी जाती हैं, जो अपने भक्तों को संतोष, खुशी, और सम्पन्नता के उपहार देती हैं। उनके प्रति श्रद्धा और समर्पण को दर्शाने वाले भक्तों का विश्वास है कि संतोषी मां व्यक्ति के जीवन में संघर्षों को सहन करने की शक्ति प्रदान करती हैं। भक्तों को यह समझना चाहिए कि संतोषी मां केवल भौतिक समृद्धि में ही नहीं, बल्कि मानसिक शांति और मानसिक स्वास्थ्य में भी सहायक सिद्ध होती हैं। संपूर्णता के लिए संतोषी मां की आराधना करना अत्याधिक महत्वपूर्ण है।

संतोषी मां की विशेषता यह है कि वह केवल उन भक्तों पर दया करती हैं जो सच्चे मन से उनकी पूजा करते हैं और जो अपने जीवन में संतोष को महत्व देते हैं। यह ध्यान रखना आवश्यक है कि संतोष की भावना केवल बाहरी वस्तुओं से नहीं, बल्कि आंतरिक शांति से भी आती है। संतोषी मां के प्रति भक्ति बढ़ाने के लिए भक्तों को नियमित रूप से उनकी पूजा अनुष्ठान का पालन करना चाहिए और व्रत रखना चाहिए।

भक्तों को यह भी सलाह दी जाती है कि वे संतोष के मूल्य को अपने जीवन में समाहित करें। कठिनाईयों के समय में भी संतोषी मां की आराधना करने से उनके भीतर सकारात्मकता बनी रहती है। अन्य देवी-देवताओं की तरह, संतोषी मां भी सच्चे भक्तों की प्रार्थना सुनती हैं और उन्हें आवश्यक मार्गदर्शन देती हैं। इसलिए, अगर आप संतोषी मां की कृपा पाना चाहते हैं, तो उनके प्रति सच्चे दिल से भक्ति अर्पित करें और उनके उपदेशों को अपने जीवन में लागू करें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *